
प्रज्ञात समाचार । गुजरात के अहमदाबाद में स्थित लगभग 400 साल पुरानी मंचा मस्जिद पर बुलडोजर चलाने की मंजूरी सुप्रीम कोर्ट ने दे दी है। इस मस्जिद को मुगल काल में बनवाया गया था और यह स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अहमदाबाद नगर निगम की सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत मस्जिद के परिसर के एक हिस्से को तोड़ा जाएगा, ताकि शहर के लिए सड़क का विस्तार किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि यह कार्रवाई जनता की भलाई के लिए है और इसमें किसी के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता। अदालत ने स्पष्ट किया कि मस्जिद की मूल संरचना पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी और केवल आसपास की खाली जमीन और प्लेटफॉर्म का हिस्सा हटाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला धार्मिक स्वतंत्रता से नहीं, बल्कि संपत्ति के अधिकार और मुआवजे से जुड़ा है। कोर्ट ने अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) को लागू नहीं माना और इस कार्रवाई को जनहित में बताया। मस्जिद ट्रस्ट की ओर से दलील दी गई कि यह संपत्ति वक्फ अधिनियम के तहत है और इसके बिना कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, लेकिन कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी। आगे की प्रक्रिया में यह तय होगा कि संपत्ति वक्फ है या नहीं और मुआवजा किस तरह का होगा।
गुजरात हाईकोर्ट ने पहले भी अहमदाबाद नगर निगम के नोटिस को सही ठहराते हुए मस्जिद परिसर के हिस्से को खाली कराने का आदेश दिया था। ट्रस्ट ने नोटिस को कानून के खिलाफ मानते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया। लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि इस सड़क चौड़ीकरण परियोजना का उद्देश्य ट्रैफिक नियंत्रण और शहरी विकास के लिए आवश्यक है, जो पूरे शहर के लाभ में है।
मस्जिद का हिस्सा तोड़ा जाएगा, परंतु इसका मुख्य ढांचा सुरक्षित रहेगा। अदालत ने परियोजना को जनहित में बताते हुए यह स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरे अहमदाबाद शहर के विकास और नागरिक सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इस मामले में मुआवजे और संपत्ति के कानूनी विवादों का निपटारा आगे की कानूनी प्रक्रिया में होगा। इस फैसले के बाद अहमदाबाद की पुरानी विरासत वाले इस धार्मिक स्थल के एक हिस्से पर बुलडोजर चलाया जाएगा, जिससे शहर का तेजी से विकास हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नागरिक हित को सर्वोपरि रखा है और कहा है कि इस कार्रवाई से धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा तथा मस्जिद का मूल ढांचा सुरक्षित रहे


















































