प्रज्ञात समाचार। यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे बसने जा रहे ‘न्यु हाथरस’ का मास्टर प्लान तेज गति से तैयार किया जा रहा है।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार की नई शहरी विकास नीति का हिस्सा है।
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने इसके लिए प्रारंभिक खाका तैयार कर लिया है।
नया हाथरस लगभग 20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बसाया जाना प्रस्तावित है।
यह क्षेत्र आगरा और अलीगढ़ मंडल के बीच रणनीतिक रूप से स्थित होगा।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को औद्योगिक गलियारे के रूप में विकसित किया जाए।
नया हाथरस एक स्मार्ट और हरित शहर के रूप में उभरेगा।
यहां उद्योग, आवास और वाणिज्यिक गतिविधियों का संतुलित मिश्रण बनाया जाएगा।
मास्टर प्लान में सड़कों, जल आपूर्ति, बिजली और परिवहन की उन्नत व्यवस्था शामिल होगी।
सरकार इसका ड्राफ्ट प्लान अगले तीन महीनों में सार्वजनिक करने की तैयारी में है।
यमुना एक्सप्रेसवे के दोनों ओर समानांतर विकास की योजना बनाई गई है।
नए शहर में आईटी पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स हब स्थापित किए जाएंगे।
खास तौर पर नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के बीच इस शहर को जोड़ा जाएगा।
यह क्षेत्र निवेशकों और उद्योगपतियों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करेगा।
राज्य सरकार यहां निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीति तैयार कर रही है।
औद्योगिक इकाइयों को सस्ती दरों पर भूमि और बिजली देने का प्रस्ताव है।
शहर के डिजाइन में ट्रैफिक जाम से मुक्त सड़क नेटवर्क पर विशेष ध्यान दिया गया है।
ग्रीन बेल्ट और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।
निवेशकों के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस की सुविधा भी जोड़ी जाएगी।
शहर के निर्माण के लिए तीन चरणों में विकास किया जाएगा।
पहला चरण लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा।
पहले चरण में सड़कें, जल आपूर्ति, जल निकास और बिजली आपूर्ति नेटवर्क बनाया जाएगा।
दूसरे चरण में औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना होगी।
तीसरे चरण में आवासीय और वाणिज्यिक ज़ोन का विस्तार किया जाएगा।
नया हाथरस, यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे बसने वाले प्रमुख शहरों में शामिल होगा।
यह परियोजना दिल्ली-एनसीआर विस्तार का भी हिस्सा मानी जा रही है।
सरकार उम्मीद कर रही है कि शहर में लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।
यह क्षेत्र पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का केंद्र बनेगा।
शहर में आधुनिक स्कूल, कॉलेज और मेडिकल यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएंगी।
स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाए जाएंगे।
शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर निगरानी कैमरे रहेंगे।
इलेक्ट्रिक बस और मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन सुविधा का प्रस्ताव है।
सौर ऊर्जा से शहर को संचालित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
परियोजना का फोकस ‘सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट’ पर है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस योजना की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
उन्होंने यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण को समयबद्ध कार्यवाही का निर्देश दिया है।
प्राधिकरण ने भूमि चिन्हांकन का काम शुरू कर दिया है।
स्थानीय किसानों से संवाद कर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तय की जा रही है।
किसानों को मुआवजा व पुनर्वास नीति के तहत उचित लाभ मिलेगा।
शहर में जल प्रबंधन के लिए झीलों और नहरों का विकास किया जाएगा।
स्मार्ट सिटी मिशन की तर्ज पर डिजिटल गवर्नेंस लागू होगी।
शहर का नागरिक डेटा सेंटर खुद यमुना एक्सप्रेसवे पर होगा।
यहां पर हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क की व्यवस्था होगी।
शहर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ई-वाहनों का उपयोग प्रोत्साहित किया जाएगा।
हर सेक्टर में पार्क और ग्रीन जोन विकसित किए जाएंगे।
शहर के प्रत्येक क्षेत्र में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य होगा।
शहर के केंद्र में राज्य सरकार के दफ्तर और प्रशासनिक भवन होंगे।
शहर की योजना में महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता पर है।
रात में सभी प्रमुख मार्गों पर एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी।
शहर को 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की तैयारी है।
JEIDA ने इस परियोजना के लिए तकनीकी सलाहकार फर्म नियुक्त की है।
नए हाथरस में औद्योगिक निवेशकों के लिए विशेष इकोनॉमिक ज़ोन विकसित होगा।
मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क भी योजना में शामिल किया गया है।
राज्य सरकार इस शहर को राष्ट्रीय स्तर पर निवेश हब के रूप में प्रस्तुत करेगी।
नई परियोजना का फोकस रोजगार, निवेश और आवास तीनों पर होगा।
शहर में वैद्युत, जल और संचार व्यवस्था अंडरग्राउंड बिछाई जाएगी।
भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
शहर के मास्टर प्लान को सार्वजनिक सुझावों के बाद अंतिम रूप मिलेगा।
प्राधिकरण ने पर्यावरण आकलन रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है।
JEIDA के अधिकारी नियमित फील्ड सर्वे कर रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना 2030 तक पूर्ण रूप से क्रियान्वित होगी।
शहर का डिजाइन ग्लोबल अर्बन मॉडल्स पर आधारित होगा।
लंदन, दुबई और सिंगापुर के शहरों से प्रेरणा ली जा रही है।
परियोजना से हाथरस जिले को नया आर्थिक स्वरूप मिलेगा।
राज्य सरकार इसे वेस्ट यूपी के विकास का आधार मान रही है।
शहर में निवेशकों के लिए ‘Invest New Hathras’ पोर्टल तैयार किया जा रहा है।
शहर में हेल्थ टेक्नोलॉजी पार्क की भी संभावना है।
कृषि आधारित उद्योगों को भी विशेष प्रोत्साहन मिलेगा।
लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और इटावा के उद्योगों को फायदा होगा।
शहर के विकास से पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
यहां यमुना किनारे रिवरफ्रंट विकसित करने पर विचार चल रहा है।
नया हाथरस प्रदेश का नया ग्रोथ इंजन बनने जा रहा है।
सरकार उम्मीद कर रही है कि यह शहर निवेश की नई कहानी लिखेगा।
शहर के वास्तु डिजाइन में भारतीय और आधुनिक शैली का संयोजन होगा।
स्मार्ट सीवेज और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जाएगा।
शहर में आधुनिक बस टर्मिनल और रेलवे स्टेशन की योजना तैयार है।
नई परियोजना में निजी डेवलपर्स को भी शामिल किया जाएगा।
विकास कार्यों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जाएगा।
राज्य सरकार ने परियोजना के लिए प्रारंभिक बजट स्वीकृत किया है।
नया हाथरस क्षेत्रीय विकास का केंद्र बनेगा।
जेवर एयरपोर्ट से सिर्फ 40 किलोमीटर की दूरी पर यह शहर बसेगा।
एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी के लिए एक्सप्रेस रोड बनाई जाएगी।
यूपी सरकार ने केंद्र से परियोजना को स्मार्ट सिटी फंडिंग में शामिल करने की मांग की है।
विदेशी निवेशक भी इस शहर में रुचि दिखा रहे हैं।
नया हाथरस औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर शहर होगा।
यहां हर क्षेत्र के लिए जोनिंग नियम तय होंगे।
विकास कार्यों की निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी।
राज्य सरकार ने इसकी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी है।
परियोजना पर अगले वित्त वर्ष में निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
नया हाथरस उत्तर प्रदेश के विकास का नया अध्याय बनेगा।
शहर की नींव आधुनिकता, टिकाऊपन और समावेशिता पर टिकी होगी।
यमुना एक्सप्रेसवे अब उत्तर भारत के सबसे तेज़ विकसित हो रहे गलियारे में तब्दील हो चुका है।
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