गाजियाबाद। डासना स्थित एसडीजीआई ग्लोबल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़ में मंगलवार को मिशन शक्ति: बालिकाओं के स्वास्थ्य सशक्तिकरण और टीबी (क्षय रोग) उन्मूलन विषय पर एक प्रभावशाली और ज्ञानवर्धक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह आयोजन बालिकाओं के स्वास्थ्य, पोषण और गंभीर बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सराहनीय पहल रही। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जो ज्ञान, जागरूकता और स्वास्थ्य के प्रतीक के रूप में किया गया। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी इस अवसर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डा.) शालिनी शर्मा, निदेशक, स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़ ने की। उन्होंने विश्वविद्यालय के माननीय पदाधिकारियों कुलाधिपति महेन्द्र अग्रवाल, उपाध्यक्ष अखिल अग्रवाल, प्रो-वाइस चांसलर नितिन अग्रवाल, प्रो-चांसलर (प्रशासन) पीयूष श्रीवास्तव, प्रो-चांसलर (अकादमिक) विमल कुमार शर्मा, कुलपति प्रो. (डा.) प्रसेनजीत कुमार और रजिस्ट्रार डा. राजीव रतन का स्वागत करते हुए उनके सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। डा. राजीव रतन, रजिस्ट्रार, ने अपने संबोधन में कहा कि एसडीजीआई ग्लोबल यूनिवर्सिटी केवल तकनीकी शिक्षा ही नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य जागरूकता और सामुदायिक सेवा को भी प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य शिक्षा विद्यार्थियों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भाव उत्पन्न करती है, जो एक स्वस्थ समाज निर्माण की नींव है। कुलपति प्रो. (डा.) प्रसेनजीत कुमार ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है जब वह समाज की भलाई और स्वास्थ्य सुधार में योगदान दे। उन्होंने कहा कि टीबी जैसी बीमारी केवल चिकित्सा की चुनौती नहीं बल्कि एक सामाजिक चुनौती भी है, जिसे जनसहयोग से ही समाप्त किया जा सकता है।

मुख्य अतिथि डा. अनिल यादव, जिला क्षय रोग अधिकारी, गाजि़याबाद ने जिले में टीबी की वर्तमान स्थिति और इसे समाप्त करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस रोग को मिटाने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि क्षय रोग, विशेष रूप से जननांग क्षय रोग, महिलाओं में बांझपन का प्रमुख कारण बन रहा है, लेकिन समय पर पहचान और उपचार से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।
डा. नेहा गोस्वामी, उप जिला क्षय रोग अधिकारी, ने अपने संबोधन में बालिकाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच न केवल बीमारियों से बचाव का माध्यम हैं, बल्कि आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती का भी आधार हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और जागरूकता ही बालिकाओं के सशक्तिकरण की सच्ची कुंजी है। सुश्री दीपाली गुप्ता, टीबी विभाग, गाजि़याबाद, ने अपने वक्तव्य में कहा कि टीबी नियंत्रण में सामुदायिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यदि समाज के स्तर पर रोगियों की पहचान, सहायता और परामर्श को प्राथमिकता दी जाए, तो टीबी उन्मूलन का लक्ष्य शीघ्र प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन अंकुर श्रीवास्तव ने किया, जिन्होंने पूरे आयोजन को संवादपूर्ण और रोचक बनाए रखा। विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछने और नई जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। कार्यक्रम का समापन सुश्री पलक हिंदवाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का समन्वय प्रो. (डा.) बबीता अग्रवाल और डा. जसप्रीत कौर, एसोसिएट प्रोफेसर, द्वारा किया गया। प्रो. (डा.) शालिनी शर्मा ने कहा कि उन्हें गर्व है कि विश्वविद्यालय ने इतने महत्वपूर्ण विषय पर यह कार्यक्रम आयोजित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और सामुदायिक जागरूकता ही स्वास्थ्य सुधार और रोग नियंत्रण के सबसे प्रभावी साधन हैं। यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा। इसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और विशेषज्ञों ने मिलकर बालिकाओं के स्वास्थ्य और टीबी नियंत्रण जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा की। आयोजन ने यह संदेश दिया कि एक स्वस्थ, सशक्त और जागरूक समाज के निर्माण में हर व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है।















































